अगर आपने कभी चेक दिया है, तो ये गलती आपको जेल पहुंचा सकती है

भूमिका (Introduction)

आज के समय में लेन-देन के लिए डिजिटल पेमेंट्स और ऑनलाइन ट्रांसफर का जमाना है, लेकिन अभी भी कई लोग और व्यापारी चेक (Cheque) का उपयोग करते हैं। चाहे वह घर का किराया हो, बिज़नेस का भुगतान हो, या किसी दोस्त को उधार दिया गया पैसा – चेक एक भरोसेमंद तरीका माना जाता है। लेकिन सोचिए अगर आपने किसी को चेक दिया और वो बैंक में जाकर पैसे नहीं निकाल पाया, तो क्या होगा?

ऐसी स्थिति को ही ‘चेक बाउंस (Cheque Bounce)’ कहा जाता है, और यह केवल एक सामान्य गलती नहीं, बल्कि कानूनी अपराध है।

इस ब्लॉग में हम जानेंगे:

  • चेक बाउंस क्या होता है?
  • इसके मुख्य कारण क्या हैं?
  • इससे जुड़े कानूनी परिणाम (Section 138 of Negotiable Instruments Act)
  • पीड़ित व्यक्ति क्या कर सकता है?
  • और अंत में, इससे बचने के आसान तरीके

🔎 चेक बाउंस क्या होता है?

जब कोई व्यक्ति (Drawer) किसी दूसरे व्यक्ति (Payee) को चेक देता है और वह चेक जब बैंक में जमा किया जाता है, लेकिन बैंक उस चेक को “डिसऑनर” कर देता है यानी भुगतान करने से मना कर देता है — तो इस स्थिति को चेक बाउंस कहा जाता है।

यह बैंक उस समय करता है जब:

  • चेक देने वाले के खाते में पर्याप्त पैसा नहीं होता
  • चेक में कोई गलती होती है (जैसे हस्ताक्षर मेल नहीं खाना)
  • खाता बंद हो गया होता है
  • चेक पर ‘स्टॉप पेमेंट’ लगा होता है

📌 चेक बाउंस होने के सामान्य कारण

  1. खाते में पर्याप्त धनराशि न होना (Insufficient Funds):
    यह सबसे आम कारण है। जब आपके खाते में उतने पैसे नहीं होते जितने का चेक काटा गया है।
  2. हस्ताक्षर मेल न खाना (Signature Mismatch):
    अगर आपने चेक पर किया गया हस्ताक्षर आपके बैंक में जमा किए गए हस्ताक्षर से मेल नहीं खाता, तो चेक बाउंस हो सकता है।
  3. ओवरराइटिंग या गलती:
    चेक पर काट-छांट, ओवरराइटिंग या अस्पष्ट लेखन भी बाउंस का कारण बन सकता है।
  4. चेक की वैधता समाप्त होना (Stale Cheque):
    एक चेक आम तौर पर 3 महीने तक वैध होता है। उसके बाद अगर चेक बैंक में जमा किया जाता है, तो वह बाउंस हो सकता है।
  5. स्टॉप पेमेंट (Stop Payment):
    अगर आपने बैंक को चेक को रोकने के लिए कह दिया हो, तो वह बाउंस हो जाएगा।
  6. खाता बंद होना:
    अगर जिस खाते से चेक जारी हुआ है वह बंद हो चुका है।

⚖️ चेक बाउंस पर कानूनी कार्रवाई – Section 138 of Negotiable Instruments Act, 1881

भारत में चेक बाउंस एक आपराधिक अपराध (Criminal Offense) है, जिसे नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत कवर किया गया है।

🔹 कानूनी प्रक्रिया:

  1. चेक बाउंस का नोटिस (Cheque Return Memo):
    जब चेक बाउंस होता है, तो बैंक एक “रिटर्न मेमो” जारी करता है जिसमें बाउंस का कारण लिखा होता है।
  2. लीगल नोटिस भेजना:
    चेक प्राप्त करने वाले को 30 दिनों के भीतर चेक बाउंस की जानकारी के साथ चेक देने वाले को लीगल नोटिस भेजना होता है।
    इस नोटिस में बकाया राशि की मांग की जाती है।
  3. 15 दिनों का समय:
    नोटिस मिलने के बाद चेक देने वाले को 15 दिन का समय दिया जाता है ताकि वह रकम चुका सके।
  4. मामला दर्ज करना:
    अगर वह व्यक्ति 15 दिन में भुगतान नहीं करता, तो पीड़ित व्यक्ति मजिस्ट्रेट कोर्ट में केस दर्ज कर सकता है।

⚠️ क्या सजा हो सकती है?

अगर कोर्ट में यह साबित हो जाता है कि चेक जानबूझकर बाउंस किया गया था या भुगतान नहीं किया गया, तो चेक देने वाले को:

  • 2 साल तक की जेल हो सकती है
  • या फिर चेक राशि का दोगुना तक जुर्माना
  • या दोनों सजा हो सकती है

⚠️ कोर्ट कई बार समझौते का मौका भी देता है। अगर आरोपी रकम चुका देता है और पीड़ित को आपत्ति नहीं होती, तो सजा से बचा जा सकता है।


💼 पीड़ित व्यक्ति (Payee) को क्या करना चाहिए?

अगर आपके पास किसी का बाउंस हुआ चेक है, तो आप ये कदम उठा सकते हैं:

  1. बैंक से रिटर्न मेमो प्राप्त करें
  2. 15 दिन के भीतर चेक देने वाले को लीगल नोटिस भेजें
  3. अगर वह भुगतान नहीं करता, तो 30 दिन के भीतर कोर्ट में शिकायत दर्ज करें
  4. सभी कागज़ात संभालकर रखें – चेक की कॉपी, रिटर्न मेमो, नोटिस की रसीद आदि

🙋‍♂️ चेक देने वाले व्यक्ति को क्या करना चाहिए?

अगर आपने किसी को चेक दिया और वह बाउंस हो गया, तो घबराने के बजाय यह करें:

  1. लीगल नोटिस का जवाब दें:
    अनदेखा बिल्कुल न करें। जवाब न देना आपके खिलाफ जा सकता है।
  2. यदि संभव हो तो भुगतान कर दें:
    कोर्ट में मामला जाने से पहले अगर आप भुगतान कर देते हैं तो मामला वहीं खत्म हो सकता है।
  3. यदि विवाद है, तो सबूत संभाल कर रखें:
    जैसे – आपने कोई वस्तु नहीं ली या सेवा नहीं मिली हो, तो उस संबंध में दस्तावेज रखें।
  4. समझौता करने की कोशिश करें:
    अदालत से बाहर मामला सुलझाना समय और पैसे दोनों की बचत कर सकता है।

✅ चेक बाउंस से कैसे बचा जाए?

व्यक्तिगत तौर पर:

  • चेक काटने से पहले खातों की जांच कर लें
  • चेक ठीक से और स्पष्ट अक्षरों में भरें
  • किसी को चेक देते समय दिनांक और हस्ताक्षर सही करें
  • चेक पर ओवरराइटिंग न करें
  • चेक का रिकॉर्ड रखें

व्यवसाय में:

  • पोस्ट-डेटेड चेक का ध्यान रखें
  • सभी चेक ट्रांजेक्शंस का रिकॉर्ड रखें
  • नियमित रूप से बैलेंस चेक करें
  • भुगतान में देरी से बचें

📋 कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

Q1: चेक बाउंस का मामला कब दर्ज किया जा सकता है?
A: जब चेक बाउंस हो जाए और नोटिस भेजने के बाद 15 दिन के अंदर भुगतान न किया जाए, तो 30 दिनों के अंदर मामला दर्ज किया जा सकता है।

Q2: क्या हर चेक बाउंस पर केस होता है?
A: नहीं। कई बार लोग आपसी सहमति से मामला सुलझा लेते हैं। परंतु बार-बार बाउंस होने पर गंभीर मामला बन सकता है।

Q3: अगर कोई जानबूझकर चेक काटता है और पैसा नहीं देता?
A: यह धोखाधड़ी माना जा सकता है और इसके लिए IPC के तहत अलग मामला चल सकता है।

Q4: चेक बाउंस होने पर CIBIL स्कोर पर असर पड़ता है क्या?
A: आमतौर पर CIBIL पर सीधा असर नहीं पड़ता, लेकिन यदि मामला कोर्ट में चला जाए और डिफॉल्ट का रिकॉर्ड बने, तो स्कोर प्रभावित हो सकता है।


🔚 निष्कर्ष (Conclusion)

चेक बाउंस एक गंभीर मामला है। कई लोग इसे हल्के में लेते हैं लेकिन यह कानूनी अपराध है और इससे व्यक्ति की साख, व्यवसाय और भविष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं। चाहे आप चेक देने वाले हों या पाने वाले — दोनों को यह जानना जरूरी है कि चेक से जुड़ी जिम्मेदारियाँ क्या हैं।

समझदारी से काम लें:

  • चेक देने से पहले सोचें
  • जरूरत हो तो डिजिटल पेमेंट का विकल्प अपनाएं
  • विवाद की स्थिति में शांत दिमाग और कानूनी सलाह से काम करें

याद रखें, “एक चेक बाउंस आपका विश्वास तोड़ सकता है — और कानून की पकड़ में ला सकता है।”

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